google-site-verification=GIaeBD26iM1El1_Rs0O2-yeM0Lzle6sVyMjx02rEXhc " स्वस्थ रहने के सूत्र "

नमस्ते! मैं [R.k.yऔर "स्वस्थ रहने के सूत्र" के माध्यम से मैं हेल्थ टिप्स, घरेलू नुस्खे, योग और संतुलित जीवनशैली से जुड़ी सरल और उपयोगी जानकारी साझा करता/करती हूँ। मेरा उद्देश्य है — हर किसी को स्वस्थ और खुशहाल जीवन जीने की प्रेरणा देना।

Monday, May 12, 2025

💖 परहेज़ 💖

► भोजन पौष्टिक हो और सभी आवश्यक तत्वों से भरपूर हो।

► मिष्ठान, पकवान, चिकनाई व अधिक मसालों के इस्तेमाल से परहेज करें।

► सोने, जागने व भोजन का समय निश्चित करें और साफ-सफाई का हर हाल में ध्यान रखें।

► बढ़ती उम्र के साथ यदि यह भाव मन में घर कर गया कि मैं बूढ़ा हो रहा हूं, तो व्यक्ति अपने इसी मंतव्य के कारण जल्दी बूढ़ा होने लग जाता है।

► शरीर का वजन न बढ़ने दें।

► क्रोध, चिंता, तनाव, भय, घबराहट, चिड़चिड़ापन, ईर्ष्या आदि भाव बुढ़ापे को न्यौता देने वाले कारक हैं। हमेशा प्रसन्नचित्त रहने का प्रयास करें। उत्साह, संयम, संतुलन, समता, संतुष्टि व प्रेम का मानसिक भाव हर पल बना रहे।

► मन में रोग का भाव बीमारियों में बढ़ोत्तरी ही करता है। स्वास्थ्य का भाव सेहत में वृद्धि करता है इसलिए दिन भर इस भाव में रहें कि मैं स्वस्थ हूं। मन में यह शंका न लाएं कि भविष्य में मुझे कोई रोग होगा।

► धूम्रपान, मादक पेय- पदार्थ (जरदा, गुटखा, सॉफ्ट ड्रिंक जैसे कोकाकोला, पेप्सी इत्यादि एवं शराब आदि )) सर्वथा छोड़ दो।

🫢 स्वस्थ निरोग 🫢

👉तनावमुक्त होकर तथा मन व शरीर शांत रखकर व्यायाम करें।

👉 इस हकीकत को स्वीकारें कि हमेशा युवा नहीं रह सकतीं। चाहे दिन रात व्यायाम करें। बढ़ती उम्र को गर्व से स्वीकार करें।

👉अच्छे स्वास्थ्य और लंबी जिंदगी के लिए योगाभ्यास तो जरूरी है ही पर इसके अतिरिक्त कुछ सामान्य नियमों और सावधानियों का पालन भी आवश्यक है। इन नियमों-सावधानियों व जानकारियों के पालन से दिनचर्या व्यवस्थित होने लगती है और हम लंबे समय तक युवा बने रह सकते हैं।

👉प्रातः काल सूर्योदय से पूर्व उठने का नियम बनाएं। इसके लिए रात में जल्दी सोने की आदत डालें। सुबह उठने के बाद शौचादि से निवृत्त होकर ऊषापान करें। ऊषापान के लिए रात में पानी तांबे के बर्तन में भर कर रख दें और सुबह उसमें से लगभग दो गिलास पानी खाली पेट पीएं। सर्दी के मौसम में पानी थोड़ा गुनगुना कर लें।

👉सूर्योदय से पहले ही नित्यकर्म से निवृत्त होकर खुले वातावरण में जाकर योगाभ्यास करें।

👉अपनी दिनचर्या में शारीरिक श्रम को महत्व दें। कई रोग इसीलिए पैदा होते हैं, क्योंकि हम दिमाग से अधिक और शरीर से कम काम लेते हैं। आलस्य त्यागकर पैदल चलने, खेलने, सीढ़ी चढ़ने, व्यायाम करने, घर के कामों में हाथ बंटाने आदि शारीरिक श्रम वाली गतिविधियों में लगें।

👉दिन में कम से कम दो लीटर पानी अवश्य पीओ।

👉भूख लगने पर ही भोजन करें। जितनी भूख हो, उससे थोड़ा कम खाएं। अच्छी तरह चबा कर खाएं। दिन भर कुछ न कुछ खाते रहने का स्वभाव छोड़ दें। दूध, छाछ, सूप, जूस, पानी आदि तरल पदार्थों का अधिकाधिक सेवन करें।

👉 प्रकृति के नियमों के अनुरूप चलें, क्योंकि \'कुदरत से कुश्ती\' करके कोई निरोगी नहीं हो सकता।

👉प्रतिदिन योगाभ्यास का नियम बनाएं।

Sunday, May 11, 2025

💮 स्वस्थ जीवन 💮

► हर दिन 10 मिनट का व्यायाम बीमारियों से लडऩे की शक्ति को 40 फीसदी तक बढ़ाता है।

    ► दफ्तर की सीढिय़ां चढऩा, उतरना तथा पार्किग स्थल से दफ्तर तक पैदल चलना भी तरोताजा रखने वाला व्यायाम है/

► सुबह-सुबह 10 मिनट की जॉगिंग कई घंटों तक आपमें चुस्ती बरकरार रख सकती है। यह ध्यान रखें कि व्यायाम को मौजमस्ती में करें यानी उसे बोझ समझकर न करें।

► अगर बाहर जाकर व्यायाम करना संभव न हो तो संगीत की धुन पर 10 मिनट डांस करिए।

► प्रातः उठते ही खूब पानी पीओ। दोपहर भोजन के थोड़ी देर बाद छाछ और रात को सोने के पहले उष्ण दूध अमृत समान है।

► बुखार, थकान, कमजोरी महसूस करने की स्थिति में व्यायाम से बचें।

► ध्यान रखें, जहां व्यायाम करें वहां शांति हो, जगह साफ-सुथरी हो, प्राकृतिक हवा हो और पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी हो।

► व्यायाम का समय बढ़ाना हो तो धीरे-धीरे बढ़ाएं, एकदम से समय बढ़ाने से थकान, कमजोरी की शिकार हो सकती हैं।

► व्यायाम के समय बातचीत न करें, व्यायाम के समय चुप रहने से फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है।
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Wednesday, May 7, 2025

🥝 काजू प्रयोग 🥝

🌰पैरो की एडियों में दरारे हो, पेट में कृमि हो तो बच्चों को २/३ काजू शहद के साथ अच्छी तरह तरह से चबा चबा कर खाने दे…और बड़े है तो ५/७ काजू…..कृमि,कोढ़, काले मसुडो आदि में आराम होगा |
काजू प्रयोग से मन भी मजबूत होता है

🌰स्मृति रक्षा
नंगे सिर धूप में ना घुमे, स्मृति शक्ति कमजोर होती है |

🌰रसायन कल्प
त्रिफला + तिल का तेल + शहद संभाग मिलाकर रख ले…रोज १० ग्राम खा के गुनगुना पानी पिए… पेट की तकलीफ , मासिक तकलीफे और दमे की तकलीफे दूर होगी….
ऐसा १ महीने लेने से शरीर का शोधन हो जाता है …और ३ महीने करो तो चेहरे पे चमक आ जायेगी -एक रसायन कल्प हो जाता

🌰नेत्र ज्योति अच्छी रखने के लिए
नेत्र ज्योति बढ़ने के लिए कालीमिर्च(पाउडर)+ घी और शहद मिलाकर चाटो तोनेत्र ज्योति अच्छी रहेगी |
सोते समय इरन्डी तेल का आज्ञाचक्र पे तिलक कर के सो जाओ तो नेत्र ज्योतिअच्छी रहेगी

🌰दमा के लिए
नारियल की जटा जलाकर रख कर ले ...कप्पड़ छान कर दे, थोडी राख शहद के साथ १ महीने तक ले, दमा चला जायेगा|
कानों की श्रवण शक्ति
रोज कड़वा तेल (सरसों का तेल ) की बूंदे कान में डालो और उंगली घुमाये तो जिंदगी भर आप अच्छे से सुन पाएंगे।
होंठ फटने पर
जिन के होंठ फटते है, वो नाभि में तेल डाले, तो होठ नही फटेंगे।

🌰तुलसी कब नहीं तोडें?
१२ बजे के बाद तुलसी नही तोड़ना चाहिए , फूल पत्ते भी नही तोड़ना चाहिए… तुलसी के पत्ते ७ दिन तक बसी नही माने जाते …
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🫢दिनचर्या में इतना सा सुधार करेंगे तो बचें रहेंगे डाइबिटीज से हमेशा 🫢

आज के दौर में मुझे तनाव नहीं है... यह वाक्य शायद ही किसी के हों, क्योंकि तनाव हमारे जीवन को एक अभिन्न पहलू बनता जा रहा है थोड़ा बहुत तनाव जीवन में स्वाभाविक होता है, परन्तु जब यह अपनी पराकाष्ठा को पार कर जाय ,तो मानसिक विकारों के साथ-साथ हृदय सहित डाइबिटीज जैसे रोगों को निमंत्रण देता है। दुनिया में डाइबिटीज जैसे शारीरिक विकारों की उत्पत्ति के पीछे भी अनियमित खानपान एवं तनावयुक्त दिनचर्या एक बड़ा कारण है, आज दुनिया में जिस प्रकार डाइबिटीज के रोगी बढ़ रहे हैं ,भारत भी इस मामले में एक कदम आगे है, यूं ही नहीं हमें डाइबिटीज की राजधानी में रहने का गौरव दिया गया है।

लेकिन हमारी संस्कृति, धर्म एवं जीवन जीने के सिद्धांतों ने इसे हजारों वर्ष पहले ही भांप लिया था, शायद हमारे आचार्यों की दिव्य दूरदृष्टि का यह कमाल ही रहा होगा कि आयुर्वेद एवं योग में ऐसे कई उपाय बताये गए ,जिससे जीवन को जीने की सही कला विकसित हुई ,लेकिन यह भी एक कटु सत्य है, कि हमने आधुनिकता एवं भौतिकता की अंधी दौड़ में इन सबको कहीं भुला दिया और आधुनिक पश्चिमी जीवनशैली का अनुकरण करने लग गए ,इसकी फलश्रुति डाइबिटीज जैसी शारीरिक विकृतियों के रूप में सामने आयी। आज पुरी दुनिया योग एवं आयुर्वेद को अपना कर यह साबित कर रही है, कि हमारे आचार्यों का विज्ञान तथ्यों से पूर्ण था। 

आयुर्वेद में सदियों पूर्व प्रमेह रोग के रूप में डाइबिटीज को समाहित किया था, एवं इसके मूल कारणों में आरामतलबी जीवन एवं खानपान को बतलाया गया था। आइए आज हम कुछ ऐसे उपायों पर चर्चा करेंगे जिससे आपको इस विकृति को शरीर में सुकृति के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी।
⭐आप कफ बढाने वाले खान-पान एवं दिनचर्या (दिन में सोने) से बचें।
⭐नियमित व्यायाम से आप डाइबिटीज सहित हृदय रोगों से भी बचे रह सकते हैं इसके लिए योग अभ्यास ( पश्चिमोत्तासन एवं हलासन का अभ्यास ) एक महत्वपूर्ण साधन है।
⭐संतुलित भोजन को प्राथमिकता दें।
⭐रोज खाने के बाद थोड़ी देर जरूर टहले।
⭐धूम्रपान व मद्यपान से बचें।

⭐जामुन के गुठली का चूर्ण ,नीम के पत्र का चूर्ण,बेल के पत्र का चूर्ण ,शिलाजीत , गुडमार ,करेला बीज एवं त्रिफला का चूर्ण चिकित्सक के परामर्श से लेना डाइबिटीज के रोगियों के लिए फायदेमंद होगा।

⭐कुछ आयुर्वेदिक औषधियां जैसे वसंतकुसुमाकर रस ,त्रिबंग भस्म ,शिलाजीत,चंद्रप्रभावटी इस रोग में दी जानेवाली प्रचलित औषधी हैं।
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Monday, May 5, 2025

💮 भूख बढ़ाने के कुछ असरदार नुस्खे 💮

हमारे शरीर की अग्नि खाये गये भोजन को पचाने का काम करती हैयदि यह अग्निकिसी कारण से मंद पड़ जाये तो भोजन ठीक तरह से नही पचता हैभोजन के ठीक सेनही पचने के कारण शरीर में कितने ही रोग पैदा हो जाते हैअनियमित खानपानसे वायु पित्त और कफ़ दूषित हो जाते हैजिसकी वजह से भूख लगनी बंद हो जातीहैऔर अजीर्ण अपच वायु विकार तथा पित्त आदि की शिकायतें आने लगती हैभूखलगनी बंद हो जाती हैशरीर टूटने लगता हैस्वाद बिगड जाता हैपेट में भारीपन महसूस होने लगता हैपेट खराब होने सेदिमाग खराब रहना चालू हो जाता हैअथवा समझ लीजिये कि शरीर का पूरा का पूरातंत्र ही खराब हो जाता हैइसके लिये मंन्दाग्नि से हमेशा बचना चाहिये औरतकलीफ़ होने पर इन दवाओं का प्रयोग करना चाहिये।

1. भूख नही लगने पर आधा माशा फ़ूला हुआ सुहागा एक कप गुनगुने पानी में दो तीन बार लेने से भूख खुल जाती है।

2. काला नमक चाटने से गैस खारिज होती हैऔर भूख बढती हैयह नमक पेट को भी साफ़ करता है।

3. हरड का चूर्ण सौंठ और गुड के साथ अथवा सेंधे नमक के साथ सेवन करने से मंदाग्नि ठीक होती है।

4. सेंधा नमकहींग अजवायन और त्रिफ़ला का समभाग लेकर कूट पीस कर चूर्णबना लेंइस चूर्ण के बराबर पुराना गुड लेकर सारे चूर्ण के अन्दर मिलादेंऔर छोटी छोटी गोलियां बना लेंरोजाना ताजे पानी से एक या दो गोली लेनाचालू कर देयह गोलियां खाना खाने के बाद ली जाती हैइससे खाना पचेगा भी औरभूख भी बढेगी।

5. हरड को नीब की निबोलियों के साथ लेने से भूख बढती हैऔर शरीर के चर्म रोगों का भी नाश होता है।

6. हरड गुड और सौंठ का चूर्ण बनाकर उसे थोडा थोडा मट्ठे के साथ रोजाना लेने से भूख खुल जाती है।

7. छाछ के रोजाना लेने से मंदाग्नि खत्म हो जाती है।

8. सोंठ का चूर्ण घी में मिलाकर चाटने से और गरम जल खूब पीने से भूख खूब लगती है।

9. रोज भोजन करने से पहले छिली हुई अदरक को सेंधा नमक लगाकर खाने से भूख बढती है।

10. लाल मिर्च को नीबू के रस में चालीस दिन तक खरल करके दो दो रत्ती की गोलियां बना लेंरोज एक गोली खाने से भूख बढती है।

11. गेंहूं के चोकर में सेंधा नमक और अजवायन मिलाकर रोटी बनवायी जायेइससे भूख बहुत बढती है।

12. मोठ की दाल मंदाग्नि और बुखार की नाशक है।

13. डेढ ग्राम सांभर नमक रोज सुबह फ़ांककर पानी पीलेंमंदाग्नि का नामोनिशान मिट जायेगा।

14. पके टमाटर की फ़ांके चूंसते रहने से भूख खुल जाती है।

15. दो छुहारों का गूदा निकाल कर तीन सौ ग्राम दूध में पका लेंछुहारोंका सत निकलने पर दूध को पी लेंइससे खाना भी पचता हैऔर भूख भी लगती है।

16. जीरा सोंठ अजवायन छोटी पीपल और काली मिर्च समभाग में लेंउसमे थोडीसी हींग मिला लेंफ़िर इन सबको खूब बारीक पीस कर चूर्ण बना लेंइस चूर्ण काएक चम्मच भाग छाछ मे मिलाकर रोजाना पीना चालू करेंदो सप्ताह तक लेने सेकैसी भी कब्जियत में फ़ायदा देगा।

17. भोजन के आधा घंटा पूर्व चुकन्दर गाजर टमाटर पत्ता गोभी पालक तथा अन्यहरी साग सब्जियां व फ़लीदार सब्जियों के मिश्रण का रस पीने से भूख बढतीहै।

18. सेब का सेवन करने से भूख भी बढती है और खून भी साफ़ होता है।

19. अजवायन चालीस ग्राम सेंधा नमक दस ग्राम दोनो को कूट पीस कर एक साफ़बोतल में रखलेंइसमे दो ग्राम चूर्ण रोजाना सवेरे फ़ांक कर ऊपर से पानी पीलेंइससे भूख भी बढेगी और वात वाली बीमारियां भी समाप्त होंगी।

20. एक पाव सौंफ़ पानी में भिगो देंफ़िर इस पानी में चौगुनी मिश्री मिलाकर पका लेंइस शरबत को चाटने से भूख बढती है।

21. पकी हुई मीठी इमली के पत्ते सेंधा नमक या काला नमक काली मिर्च और हींग का काढा बनाकर पीने से मंदाग्नि ठीक हो जाती है।

22. जायफ़ल का एक ग्राम चूर्ण शहद के साथ चाटने से जठराग्नि प्रबल होकर मंदाग्नि दूर होती है।

23. सोंफ़ सोंठ और मिश्री सभी को समान भाग लेकर ताजे पानी से रोजाना लेना चाहिये इससे पाचन शक्ति प्रबल होती है।

24. जवाखार और सोंठ का चूर्ण गरम पानी से लेने से मंदाग्नि दूर होती है।

25. लीची को भोजन से पहले लेने से पाचन शक्ति और भूख में बढोत्तरी होती है।

26. अनार भी क्षुधा वर्धक होता हैइसका सेवन करने से भूख बढती है।

27. नीबू का रस रोजाना पानी में मिलाकर पीने से भूख बढती है।

28. आधा गिलास अनन्नास का रस भोजन से पहले पीने से भूख बढती है।

29. तरबूज के बीज की गिरी खाने से भूख बढती है।

30. बील का फ़ल या जूस भी भूख बढाने वाला होता है।

31. इमली की पत्ती की चटनी बनाकर खाने से भूख भी बढती हैऔर खाना भी हजम होता है।

32. सिरका सोंठ काला नमक भुना सुहागा और फ़ूला हींग समभाग मे लेकर मिला लेंरोजाना खाने के बाद भूख बढती है।

33. सूखा पुदीना बडी इलायची सोंठ सौंफ़ गुलाब के फ़ूल धनिया सफ़ेद जीराअनारदाना आलूबुखारा और हरड समान मात्रा में लेकर चूर्ण बना लेंमंदाग्निअवश्य दूर हो जायेगी।

34. एक ग्राम लाल मिर्च को अदरक और नीबू के रस में खरल कर लेंफ़िर इसकीकाली मिर्च के बराबर की गोलिया बना लेंयह गोली चूसने से भूख बढती है।

⭐ आहार विहार से स्वास्थ्य संवर्ध्दन एवं सुधार रोज की दिनचर्या में ⭐

प्रातः उठने से रात्रि विश्राम तक आहार- विहार सूत्रों का क्रम
१. प्रातः सूर्योदय से पूर्व बांयी करवट से उठकर बिस्तर पर बैठें तथा परम सत्ता से दिन के उज्ज्वल भविष्य की प्रार्थना करें।

२. नासिका के चलते स्वर को पहचानें, तदनुरूप दाँया या बाँया नंगा पैर पृथ्वी पर पहले रखें फिर दूसरा।

३. बेड टी लेना हानिकारक है। बिना कुल्ला किए, शौच क्रिया से पूर्व एक से
तीन गिलास तक ताम्रपात्र का जल घूँट- घूँट कर पियें।
महत्वपूर्ण - स्वच्छ ताम्रपात्र में जल, रात्रि में शयन के पूर्व खौलता हुआ भरें तथा पात्र को सिरहाने रखें। इसमें थोड़ी मेथीदाना तथा चुटकी भर अजवायन मिला सकते है। शीतकाल में यह जल अलग से पुनः गुनगुना करके पिया जा
सकता है।

४. शौच क्रिया से निवृत्त हों।

५. दंत मंजन (तम्बाकू रहित) मध्यमा अंगुली से करें। जिह्वा की सफाई प्रथम दो या तीन अंगुलियों के दबाव से करें।

६. मुख धोते समय स्वच्छ जल के छींटे आँखों में दें।

    शौच उपरान्त स्वच्छ ताजा जल से नहायें। जिन्हें ब्रह्ममुहूर्त में नहाने की आदत न हो वे जल से हाथ, पैर, मुँह धोकर पूर्व दिशा की ओर मुख कर सुखासन में कमर सीधी कर बैठें। नेत्र बंद करें। उगते सूर्य की कल्पना करते हुए १०/१५ मिनट मंत्र जप करें। गायत्री परिजन विधि- विधान से गायत्री उपासना करें।

   सुबह खुली हवा में कम से कम ४ से ५ कि.मी. तक अकेले टहलने की
आदत डालें। प्रज्ञायोग व्यायाम को महत्ता दें एवं नित्य क रने की आदत डालें।

 गहरी श्वाँस की क्रिया
 (‘ॐ भूर्भुवः स्वः’ श्वास लेने के समय मन में बोलें, ‘तत्सवितुर्वरेण्यं’ बोलें तब तक श्वास अन्दर रोकें, ‘भर्गो देवस्य धीमहि’ के साथ श्वास को बाहर करें, ‘धियो योनः प्रचोदयात्’ के साथ श्वास बाहर रोकें)

 प्रातः खुली हवा में या तुलसी के बिरवे के पास सुखासन में बैठकर
कम से कम ५ मिनट करें। गंभीर रोगों में यह क्रिया २- ३ बार दुहरायी जा
सकती है।

         सुबह की चाय के स्थान पर नींबू, शहद तथा पानी (जाड़ों में गुनगुना) लें या एक प्याला गरम पानी चाय की तरह पियें। कब्ज के रोगी, चाय के स्थान पर गरम पानी चाय की तरह दिन में तीन- चार बार पी सकते हैं।
य सुबह का नाश्ता आवश्यक नहीं है। यदि लेना ही है तो सीजनल फल/फल रस,अंकुरित दलहनें, वर्षाकाल को छोड़कर अन्य दिनों में दही के साथ
खजूर, अंकुरित गेहूँ का दलिया गाय के दूध में लिया जा सकता है।

 मैदे से
बनी डबल रोटी, तली भुनी चीजें, तथा फास्ट फूड का सेवन हानिकारक है।
य दोपहर का भोजन ८ से १२ एवं रात्रि का सायं ६ से ८ तक अवश्य कर लें। जिन्होने सुबह हल्का नाश्ता किया है, वे भोजन दो घंटे के अंतराल से लें।

(अ) भोजन से पूर्व निम्र प्रक्रियाएं अपनायें :-
१. पालथी लगाकर बैठें २. गायत्री मंत्र या कोई भी प्रार्थना तीन बार बोलें

३. जल पात्र साथ में रखें ४. गला एवं भोजन नली के अत्यधिक सूखे होने की दशा में तीन आचमन मध्य में ले सकते हैं।

(ब) भोजन काल में ध्यान रखें :-
१ भोजन के संतुलित ग्रास को चबा चबा कर खायें ।।

२ शांत मन से एवं बिना किसी से बात किए भोजन ग्रहण करें।

३ प्रथम डकार आने तक भोजन समाप्त करने की आदत डालें।

४ भोजन काल में तथा उसके उपरांत एक घंटे तक पानी न पियें।

महत्वपूर्ण- भोजन से पूर्व अधिक प्यास लगने पर जल आधा घंटे पूर्व पी सकते हैं। यदि सभी खाद्य पदार्थ रूखे सूखे हैं तो भोजन के मध्य २- ३ घूँट पानी अवश्य पियें।

खाली सीपी

खाली सीपी अगर यहाँ बैठो तुम खाली सीपी बनकर जो आने दे अंदर आती साँस को ताकि वो सृजन की प्राणदायी महक से पखार दे तुम्हारे अंतस को और निकाल दे ...